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mat kar saaj si.ngaar sundarii - - Jagmohan

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मत कर साज सिंगार सुन्दरी
मत कर साज सिंगार सुन्दरी मत कर साज सिंगार
गहने शर्माये से रहते
गहने शर्माये से रहते तुझे निहार निहार
मत कर साज सिंगार सुन्दरी मत कर साज सिंगार

मोती सी तू खुद उजली है हाँ
और चंचल तू बिजली सी है हाँ
ऊपर के इस ठाठ बाट से -२
तुझको क्या दरकार
मत कर साज सिंगार सुन्दरी मत कर साज सिंगार

( अपनी ज़ुल्फ़ों को छितरा दे
होंठों पर तू हँसी बिछा दे ) -२
चोटी के दो हिस्से कर के -२
बना गले का हार
मत कर साज सिंगार सुन्दरी मत कर साज सिंगार

( एक बार तू देख ले दर्पन
मस्त बना ले सुन्दरी
मस्त बना ले अपना जीवन ) -२
अपनी मनमोहक सूरत पे खुद हो जा बलिहार -२
मत कर साज सिंगार सुन्दरी मत कर साज सिंगार

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