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ye inaayate.n Gazab kii - - Jagjit Singh

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ये इनायतें ग़ज़ब की, ये बला की महरबानी
मेरी ख़ैरियत भी पूछि, किसी और की ज़ुबानी

मेरी बेज़ुबान आँखों से, ये गिरे हैं चंद क़तरे
वो समझ सकें तो आँसू, न समझ सकें तो पानी

तेरा हुस्न सो रहा था मेरी छेड़ ने जगाया
वो निगाह मैं ने डाली, कि सँवर गयी जवानी

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ये घट बता रही है, कि बरस चुका है पानी

Comments/Credits:

			 % Transliterator: K Vijay Kumar
		     
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