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yahii fiqr hai shaam pichhale sawere

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यही फ़िक़्र है शाम पिछले सवेरे -२
हसीनों की गलियों के हों हेरे-फेरे -२
यही फ़िक़्र है शाम पिछले सवेरे

मेरे जज़्ब-ए-दिल की कशिश देख लेना -२
के ख़ुद ही चले आयेंगे पास मेरे -२
यही फ़िक़्र है शाम पिछले सवेरे

ज़मीं पर उतर आया चाँद आसमाँ से -२
ग़रीबों के घर आज होंगे बसेरे -२
यही फ़िक़्र है शाम पिछले सवेरे

कोई बात पूछे न पूछे हमें क्या -२
दर-ए-यार पर अब लगाये हैं डेरे -२

यही फ़िक़्र है शाम पिछले सवेरे
हसीनों की गलियों के हों हेरे-फेरे -२

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