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sun pagalii pavan

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सुन पगली पवन सुन उड़ती घटा -२
मेरे अन्ग अन्ग से हर उमन्ग से
कलियाँ चिटकने की आती है सदा
सुन पगली पवन सुन उड़ती घटा
सुन पगली पवन

है मस्त फ़ज़ा मन पूछ रहा
आईं साँवरी घटाएँ किस ओर से
मौसम है हसीं छुप छुप के कहीं
गाए बाँवरी कोयल बड़े ज़ोर से
गाए गीत प्यार के इन्तेज़ार के
नग़में बरसते हैं होता है नशा
सुन पगली पवन सुन उड़ती घटा -२
मेरे अन्ग अन्ग से हर उमन्ग से
कलियाँ चिटकने की आती है सदा
सुन पगली पवन सुन उड़ती घटा
सुन पगली पवन

बिजली की चमक दिखलाए झलक
उड़ूँ बादलों के सन्ग सन्ग झूम के
झूला है मेरा रन्गीन धनक
नीले आस्मान को आई हूँ मैं चूम के
दिल थाम थाम लूँ पी का नाम लूँ
अपने तड़पने का लेती हूँ मज़ा
सुन पगली पवन सुन उड़ती घटा -२
मेरे अन्ग अन्ग से हर उमन्ग से
कलियाँ चिटकने की आती है सदा
सुन पगली पवन सुन उड़ती घटा
सुन पगली पवन

Comments/Credits:

			 % Transliterator :Pulkit Sharma (pulkit_sadabahar@yahoo.com)
% Date :23 february 2004
% Series :NOOR-E-TARANNUM

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