sab pe.nch\-o\-taab\-e\-shauq ke tuufaan tham ga_e
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सब पेंच-ओ-ताब-ए-शौक़ के तूफ़ान थम गए
वो ज़ुल्फ़ खुल गई तो हवाओं के ख़म गए
वो जिनसे शौक़ से तबस्सुम थी पर्दादार
आख़िर वो कौन थे कि बम-ए-शाम-ए-नम गए
वहशत सी एक लाला-ए-ख़ूनी क़फ़न से थी
अबके बहार आये तो समझो कि हम गए
ऐसी कोई ख़बर तो नहीं साकिनान-ए-शहर
दरिया मोहब्बतों के जो बहते थे थम गए