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qissaa\-e\-shauq kahuu.N dard kaa afasaanaa kahuu.N - - Mujaddad Niazi

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क़िस्सा-ए-शौक़ कहूँ दर्द का अफ़साना कहूँ
दिल हो क़ाबू में तो उस शोख़ से क्या-क्या न कहूँ

कुछ है इकरार उन्हें अपनी सितमगारी का
फिर भी इसरार है मुझसे के मैं ऐसा न कहूँ

आप बैठें तो सही आ के मेरे पास कभी
के मैं फ़ुरक़त में हदीस-ए-दिल-ए-दीवाना कहूँ

Comments/Credits:

			 % Song Courtesy: http://www.indianscreen.com
% Credits: Urzung Khan, Afzal A Khan
		     
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