Browse songs by

nawaazish karam shukriyaa meharabaanii

Back to: main index
View: Plain Text, हिंदी Unicode, image


नवाज़िश करम शुक्रिया मेहरबानी
मुझे बख़्श दी आपने ज़िंदगानी

जवानी की जलती हुई दोपहर में
ये ज़ुल्फ़ों के साये घनेरे घनेरे
अजब धूप छाँव का आलम है तारी
महकता उजाला चमकते अंधेरे
ज़मीं की फ़ज़ा हो गई आसमानी

लबों की ये कलियाँ खिली अध-खिली सी
ये मख़नूर आँखें गुलाबी गुलाबी
बदन का ये कुन्दन सुनहरा सुनहरा
ये कद है कि छूटी हुई माहताबी
हमेशा सलामत रहे ये जवानी

View: Plain Text, हिंदी Unicode, image