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mujhako Gam\-e\-haalaat kii tasviir samajhnaa

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मुझ को ग़म-ए-हालात की तस्वीर समझ्ना
इस ख़त को मेरी आख़िरी तहरीर समझ्ना

अफ़्साना ग़म-ए-दिल का तुझे कैसे सुनाऊं
टूटा जो सितम दिल पे तुझे कैसे बताऊं
इस पयार को बिगड़ी हुई तक़दीर समझ्ना

चाहा तो बुहत मैं ने तेरा साथ न छुटे
हाथों से मेरे तेरा कभी हाथ न छुटे
इस ख़्ह्वाब को क़िसमत की ताबीर समझ्ना

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