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misl\-e\-Kayaal aaye the aa kar chale gaye

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मिस्ल-ए-ख़याल आये थे आ कर चले गये
दुनिया हमारे ग़म की बसा कर चले गये

फूलों की आस जिन से लगाये हुए थे हम
कांटे वो रास्ते में बिछा कर चले गये

आई ना थी हमारे चमन में बहार भी
वो आग आशियाँ में लगा कर चले गये

भूले से भी कभी न जिन्हें हम भुला सके
दिल से हमें वो अपने भुला कर चले गये

Comments/Credits:

			 % Transliterator:Urzung Khan 
% Date: Navember 27, 2001
% Credits: Sudhir
% Comments: Good poetry,good tune and good rendition.
		     
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