mayyaa, mohi daa_uu bahut khijaayau
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मैया, मोहि दाऊ बहुत खिजायौ |
मोसों कहत मोल कौ लिन्हौं, तू जसुमति कब जायौ ||
कहा कहौं इहि रिस के मारे खेलत हौं नही जात |
पुनि पुनि कहत कौन है माता, को है तेरो तात ||
गोरे नंद, जसोदा गोरी, तू कत स्याम सरीर |
चुटकी दै दै हँसत ग्वाल सब, सिखै देत बलबीर ||
तू मोहीं कों मारन सीखी, दाउहि कबहुँ न खीझै |
मोहन-मुख रिस की ये बातें, जसुमति सुनि-सुनि रीझै ||
"सुनहु कान्ह, बल्भद्र चबाइ, जनमत ही कौ धूत" |
सूर श्याम, "मोहिं गौधन की सौं, हौं माता तू पूत" ||
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% Credits: V S Rawat, 27/01/04