Browse songs by

maulaa shab\-e\-Gam subaho.n kii meharam to nahii.n hai

Back to: main index
View: Plain Text, हिंदी Unicode, image


मौला शब-ए-ग़म सुबहों की मेहरम तो नहीं है
सूरज से तेरा रँग-ए-हिना कम तो नहीं है

कुछ ज़ख़्म ही खाएं चलो कुछ गुल हि खिलाएं
हर चाँद बहारों का यह मौसम तो नहीं है

चाहे अब कारगाह-ए-दहर में लगता है बहुत दिल
ऐ दोस्त कहीं यह भी तेरा ग़म तो नहीं है

चाहे वह किसी का हो लहू दामन-ए-गुल पर
सय्याद यह कल रात की शबनम तो नहीं है

इतनी भी हमें बंदिश-ए-ग़म कब थी गँवारा
पर्दे में तेरी कागुल-ए-पुर्ख़म तो नहीं है

सेहरा में बगूला भी है `मजरूह' सबा भी
हमसा कोई आवारा-ए-आलम तो नहीं है

Comments/Credits:

			 % Transliterator: Rajiv Shridhar 
% Date: 03/30/1997
		     
View: Plain Text, हिंदी Unicode, image