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maaTii kahe kumhaar ko tuu kyaa ruu.Nde mohe - - Laxmi Shankar

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(माटी कहे कुम्हार को तू क्या रूँदे मोहे
एक दिन ऐसा होयेगा मैं रूँदुँगी तोहे)-२

(आये हैं सो जाएँगे राजा रंक फ़क़ीर)-२
एक सिंघासन चढ़ि चले एक बँधे जंजीर

दुर्बल को न सताइये जाकी मोटी हाय
बिना जीभ के स्वास सौं लौह भस्म होइ जाय

चलती चाकी देखके दिया कबीरा रोय
दो पाटन के बीच में (बाकी बचा न कोय)-२

दुख में सुमिरन सब करें सुख में करे न कोय
जो सुख में सुमिरन करें तो दुख काहे होय

(पत्ता टूटा डाल से ले गई पवन उड़ाय)-२
अबके बिछड़े कब मिलेंगे दूर पड़ेंगे जाय

कबीर आप ठगाइये और न ठगिये कोय
आप ठगे सुख ऊपजे (और ठगे दुख होय)-२

माटी कहे कुम्हार को तू क्या रूँदे मोहे
एक दिन ऐसा आएगा (मैं रूँदुँगी तोहे)-२

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			 % Series: Sukhsaagar, Date = 28th Nov, 2003
% Collection of Doha written by Sant Kabir Das
		     
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