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lab\-e\-Kaamosh se afshaa hogaa - - Feroz Akhtar

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ये मौका है अपने खास-ए-यार को खुश करने का ...

इसे सुनिये तो आशिक गा रहे हैं लेकिन महबूबा भी गा सकती है
(कुछ editingके बाद:) क्यूँके अगर लड़कियां खास-ओ-खास हो सकती हैं
तो लड़के भी कोइ खास-ए-आम नहीं. ठीक कह रही हूँ न?
हम आपके लिये खास, आप हमारे लिये खास
ये बात और है के आप बयान कर देते हैं और हम नही

(लब-ए-खामोश से अफ़्शा होगा
राज़ हर रंग में रुसवा होगा ) - २
किस तव्वाको पे किसी को देखें - २
कोई तुमसा भी हसीन क्या होगा - ३

जिस भी फ़नकार का शहकार हो तुम - २
उसने सदियों तुम्हें सोचा होगा - २
राज़ हर रंग में रुसवा होगा
लब-ए-खमोश से अफ़्शा होगा

ज़ीनत-ए-घलकाये आगोश बनो - २
दूर बैठोगे तो चर्चा होगा
लब-ए-खमोश से अफ़्शा होगा
राज़ हर रंग में रुसवा होगा

सारी दुनिया हमें पहचानती है - २
कोई हमसा भी ना तन्हा होगा - २

(लब-ए-खमोश से अफ़्शा होगा
राज़ हर रंग में रुसवा होगा ) - २

Comments/Credits:

			 % Transliterator: Ravi Kant Rai (rrai@plains.nodak.edu)
% Editor: Anurag Shankar (anurag@astro.indiana.edu)
		     
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