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kuchh to ho chaaraa\-e\-Gam baat ko yak\-suu ho jaa_o - - Ghulam Ali

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कुछ तो हो चारा-ए-ग़म बात को यक-सू हो जाओ
तुम ख़फ़ा हो तो अज़ल ही को राज़ी कर लूँ

और फिर किसको पसन्द आयेगा वीराना-ए-दिल
ग़म से माना भी कि इस घर को मैं खाली कर लूँ

फेंक देने की कोई चीज़ नहीं फ़ज़ल-ओ-कमाल
वर्ना हासिद तेरी ख़ातिर मैं ये भी कर लूँ

दिल ही मिलता नहीं सिफ़लों से वगरना 'शिब्ली'
ख़ूब गुज़रे फ़लक़-बोस से जो यारी कर लूँ

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