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ko.npale.n phir phuuT aa_ii.n shaaK par kahanaa use

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कोंपलें फिर फूट आईं शाख़ पर कहना उसे
वो न समझा है न समझेगा मगर कहना उसे

वक़्त का तूफ़ान हर इक शय बहा कर ले गया
इतनी तन्हा हो गई है रहगुज़र कहना उसे

जा रहा है छोड़ कर तन्हा मुझे जिसके लिये
चैन न दे पायेगा वो सीम-ओ-ज़र कहना उसे

रिस रहा हो ख़ून दिल से लब मगर हँसते रहे
कर गया बरबाद मुझको ये हुनर कहना उसे

जिसने ज़ख़्मों से मेरा 'शहज़ाद' सीना भर दिया
मुस्करा कर आज प्यारे चारागर कहना उसे

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