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khulii\-khulii zulfo.n ko baa.Ndh bhii lo

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मु : खुली-खुली ज़ुल्फ़ों को बाँध भी लो
हो जाए न दुनिया में शाम कहीं
ऊ : ( यूँ न देखो ) -२ तुम मुझको
हो जाएं न हम बदनाम कहीं

आँखें क्यों झुकने लगी हैं आँचल क्यों ढल जाता है
कुछ तो बताओ ऐ जादूगर ये जादू क्यों चल जाता है
मु : ( भोली ) -३ बातें छोड़ भी दो
हो जाए न बातें ये आम कहीं
ऊ : यूँ न देखो ...

मु : जाम चुराकर इन आँखों के आज नशे में चूर हूँ मैं
चोर नहीं मैं जान-ए-तमन्ना आदत से मजबूर हूँ मैं
ऊ : ( चोरी ) -३ की ये बात करो न आ जाए न कोई इल्ज़ाम कहीं
मु : खुली-खुली ज़ुल्फ़ों ...

ऊ : जान तुम्हारे बस में कर दी दिल नज़राना दे डाला
तुम भी सनम क्या याद करोगे हमने क्या-क्या दे डाला
मु : ऐ जी हमपे ना एहसान करो हो जाएं न हम नीलाम कहीं
ऊ : यूँ न देखो ...

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