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kar solah si.ngaar ... o.Dh chunariyaa taaro.n kii - - C H Atma

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कर सोलह सिंगार बांवरी, महंदी से रँग हाथ चली

बड़ी बड़ी उम्मीदें लेकर, चली पिया को मनाने
मन ही मन में डरती है वो माने या न माने
हाय ये दीवाने दिल में अब दिलकी लेकर बात चली

जब उसने पी अपने देखे, आँख उसकी भर आई
ये थी अपना जिसे समझती, निकला वो हर्जाई
ये बांवरी प्रेम की देखो, आज है लेकर घाट चली

ओढ़ चुनरिया तारों की, चँदा को लेने रात चली

Comments/Credits:

			 % Transliterator: Rajiv Shridhar (rajiv@hendrix.coe.neu.edu)
% Date: Thu Aug 17 1995
% Editor: Rajiv Shridhar (rajiv@hendrix.coe.neu.edu)
		     
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