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kabhii yuu.N bhii aa merii aa.Nkh me.n

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कभी यूँ भी आ मेरी आँख में कि मेरी नज़र को ख़बर न हो
मुझे एक रात नवाज़ दे, मगर उसके बाद सहर न हो

वो बड़ा रहीम-ओ-करीम है, मुझे ये सिफ़त भी अता करे
तुझे भूलने की दुआ करूँ तो मेरी दुआ में असर न हो

मेरे बाजुओं में थकी-थकी, अभी मह्व-ए-ख़्वाब है
चाँदनी
न उठे सितारों की पालकी, अभी आहटों का गुज़र न हो

कभी दिन की धूप में झूम के, कभी शब के फूल को चूम के
यूँ ही साथ-साथ चलें सदा कभी ख़त्म अपना सफ़र न हो

Comments/Credits:

			 % Contributor: Vinay P Jain
% Transliterator: Vinay P Jain
% Date: 11 Jun 2004
% Series: Andaaz-e-Bayaan Aur
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