Browse songs by

kaahe ko raaD machaayii

Back to: main index
View: Plain Text, हिंदी Unicode, image


काहे को राड़ मचाई (२)
छोड़ो भी यह निठुराई काहे को राड़ मचाई (२)

मन के बैर को मोह से बदलो दुःख भी सुख बन जायी (२)
इसी मोह में अपना पराया दोनों की है भलाई (२)
काहे को राड़ मचाई (२)

हर पल नई बहार देखो जगत श्रिंगार (२)
खिली कली मुरझा के बिकती बंधी कली मुस्काई (२)
प्रीत की रीत (४)
प्रीत की रीत निभाना सीखो बिगड़ा काम बनाना सीखो (२)
जाके डार लिपट कर झूमी करके प्रेम सगाई (२)
काहे को राड़ मचाई (२)

Comments/Credits:

			 % Transliterator: K Vijay Kumar
		     
View: Plain Text, हिंदी Unicode, image