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jo thake thake se the hausale - - Mehdi Hassan

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जो ग़म-ए-हबीब सेए दूर थे, वो खुद अपने आग में जल गये
जो ग़म-ए-हबीब को पा गये, वो ग़मों से हँस के निकल गये

जो थकेय थकेय से ?
वो शबाब बनके मचल गये

वो नज़र नज़र से गले मिली
वो बुझे चराग भी जल गये

ये शिकस-ए-दीद की कर्वटेन भी बडी लतीफ़-ओ-जमील थी
मैं नज़र झुकाके तड़प गया
वो नज़र बचाके निकल गये

न खिज़ा में है कोई तीर ?
न बहार में है कोई रोशनी
ये नज़र नज़र के चरागें हो
कहीं बुझ गये कहीं जल गये

वो नज़र नज़र से गले मिली
वो बुझे चराग भी जल गये
जो सम्भल सम्भल के बहक गये
वो फ़रेब राह थे

वो मकाम इश्क़ को पा गये
जो बहक बहक के सम्भल गये

जो खिले हुए हैं रबिश रबिश
वो हज़ार हुस्न ?
मगर उन गुलों का जवाब क्या
जो क़दम क़दम पे कुचल गये

न हैं शायद अब, गम-ए- ?
न वो दाग-ए-दिल न वो आरज़ोओ
जिन्हें ऐताबार-ए-बहार था
वोही फूल रंग बदल गये
जो थकेय थकेय से

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