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jidhar unakii tirachhii nazar ho ga_ii

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जिधर उनकी तिरछी नज़र हो गई
क़यामत ही बर्पा उधर हो गई

वो फिर-फिर के देखें मुझे जाते-जाते
मुहब्बत मेरी पुर-असर हो गई

किया राज़ अफ़शाँ निगाहों ने दिल का
छुपाते-छुपाते ख़बर हो गई

किया क़त्ल चुटकी में 'आज़ाद' को भी
निगाह उनकी कैसी निडर हो गई

शब-ए-वस्ल भी दिल के अरमाँ न निकले
मनाते-मनाते सहर हो गई

Comments/Credits:

			 % Credits: This lyrics were printed in Listeners' Bulletin Vol #67 under Geetanjali #57
		     
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