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haay kis but kii muhabbat me.n giraftaar hue

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हाय! किस बुत की मुहब्बत में गिरफ़्तार हुए (२)
ज़िन्दगी कल्प हुई जीने से बेज़ार हुए

हमने पाया तो यह पाया है वफ़ाओं का सिला (२)
मुफ़्त बदनाम हुए, बेबस-ओ-लाचार हुए

किस लिये दौलत-ए-दिल उसपे लुटा दी हमने (२)
आप ही अपने पे क्यों मायज़-ए-गुन्ज़ार हुए

घुट के मर जायें यही दिल में है हसरत बाकी (२)
मुद्दतें गुज़री हैं बे-यार-ओ-मददगार हुए (२)
हाय! किस बुत की मुहब्बत में गिरफ़्तार हुए

Comments/Credits:

			 % Transliterator: K Vijay Kumar
		     
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