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gulashan pe hai bahaar koyal kii hai pukaar

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गुलशन पे है बहार कोयल की है पुकार
पिया आजा रे

बीता जो बचपन तो आई जवानी
उसकी कहानी पिया तुमको सुनानी
जिया है बेक़रार बातें तो हों दो-चार
पिया आजा रे
गुलशन पे है बहार ...

सखियों ने डाले हैं अम्बवा पे झूले
ऐसे समय में सैयां तुम हमको भूले
छेड़ेंगे मन के तार गाएँगे हम मल्हार
पिया आजा रे
गुलशन पे है बहार ...

आँखों में आ के पिया दिल में समा जा
उजड़ी हुई तू मेरी दुनिया बसा जा
जीवन के ये दिन चार क्यूँ जाने दें बेकार
पिया आजा रे
गुलशन पे है बहार ...

Comments/Credits:

			 % Credits: This lyrics were printed in Listeners' Bulletin Vol #42 under Geetanjali #32
		     
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