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ghir\-ghir ban me.n ghor ghataa chhaa_ii

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घिर-घिर बन में घोर घटा छाई
ओ मोरे याद तेरी आई

घिर-घिर घिर-घिर गिरें झरोके
और कौन मिलने के मौक़े
ओ बरखा दुलहन बन के आई
घिर-घिर बन में घोर घटा छाई
ओ मोहे याद तेरी आई

सावन आया पिया लो जी
तुम भी तो घर आओ ना
अज मोरे अंगना में आओ
आओ आ के जाओ न
कलप कलप हारी
और मोहे कलपाओ न
ओ मोहे याद तेरी आई
घिर-घिर बन में घोर घटा छाई
ओ मोहे याद तेरी आई

खिड़्की खोल खिड़ी नैनन की
कुछ सुन जा कुछ कह जा रे मन की
ओ मैं ने कैसी आग लगाई
घिर-घिर बन में घोर घटा छाई
ओ मोहे याद तेरी आई
घिर-घिर बन में घोर घटा छाई

इरादा था कि शादी कर के अपना घर बसाएं गे
कभी आलू, कभी गोभी, कभी मुर्ग़ा पकाएं गे
मगर हर रोज़ पतली दाल खाई, आप क्यूण रोए

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