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duniyaa kab chup rahatii hai kahne de jo kahtii hai

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दुनिया कब चुप रह्ती है
कह्ने दे जो कह्ती है
मत कर दुनिया की बात सजन
कहीं बीत ना जाए रात सजन

ये रात बङी मत्वाली है
इस रात को अप्ना मीत बना
मैं ज़ुल्फ़ों को बिखराती हूं
तू साँसों को संगीत बना
आ झूम ले मेरे साथ सजन
कहीं बीत ना जाए रात सजन

तेरे ही लिए है पृत मेरी
सब गीत मेरे हैं तेरे लिए
होंठों पे सजाके दिल की सदा
लाई हूं पिया मैं तेरे लिए
आ थाम ले मेरा हाथ सजन
कहीं बीत ना जाए रात सजन

दुनिया कब चुप रह्ती है
कह्ने दे जो कह्ती है

Comments/Credits:

			 % Transliterator :Pulkit Sharma (pulkit_sadabahar@yahoo.com)
% Date :7th nov 2003
% Series :NOOR-E-TARANNUM
		     
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