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din kuchh aise Guzaarataa hai ko_ii

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दिन कुछ ऐसे ग़ुज़ारता है कोई
जैसे एहसाँ उतारता है कोई
दिन कुछ ऐसे ...

आईना देख कर तसल्ली हुई
हमको इस घर मे जानता है कोई
दिन कुछ ऐसे ...

पक गया है शजर पे फल शायद
फिर से पत्थर उछालता है कोई
दिन कुछ ऐसे ...

दूर से ग़ुज़रते हैं सन्नाटे
जैसे हमको पुकारता है कोई
दिन कुछ ऐसे ...

Comments/Credits:

			 % Transliterator: V S Rawat, Apr 25, 2003
		     
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