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dil pe jab terii inaayat kii kamii rahatii hai - - Talat

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दिल पे जब तेरी इनायत की कमी रहती है
ज़िंदगी दर्द के साँचे में ढली रहती है

मेरे दामन में तो अश्कों के सिवा कुछ भी नहीं
चाँद तारों से तेरी माँग भरी रहती है

आलम-ए-यास में डूबा ये बहारों का समाँ
गर्द की धूल कि चेहरे पे जमी रहती है

तेरे बख़्शे हुये हर दाग़-ए-मुहब्बत की क़सम
अंजुमन दिल की सितारों से सजी रहती है

Comments/Credits:

			 % Credits: U V Ravindra
		     
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