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dil me.n ab dard\-e\-muhabbat ke sivaa kuchh bhii nahii.n

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दिल में अब दर्द-ए-मुहब्बत के सिवा कुछ भी नहीं
ज़िन्दगी मेरी इबादत के सिवा कुछ भी नहीं

मैं तेरी बरह-गह-ए-नाज़ में क्या पेश करूं
मेरी झोली में मुहब्बत के सिवा कुछ भी नहीं

ऐ खुदा मुझसे ना ले मेरे गुनाहों का हिसाब
मेरे पास अश्क़-ए-नदमत के सिवा कुछ भी नहीं

वो तो मिट कर मुझ को मिल ही गयी राहत वरना
ज़िन्दगी रन्ज़-ओ-मुसीबत के सिवा कुछ भी नहीं

Comments/Credits:

			 % Transliterator: Ravi Kant Rai (rrai@plains.nodak.edu)
		     
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