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dil ke viiraane me.n ik shammaa hai

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दिल के वीराने में इक शम्मा है अब तक रोशन -२
कोई परवाना मगर अब न इधर आयेगा -२

ज़िंदगी बीत गई प्यार में जलते-जलते
कोई उम्मीद पराई न कोई दोस्त बनी
जगमगाया न सितारा कोई अरमानों का
हमने दिल को भी जलाया तो सियाह रात बनी
दिलजलों पर कोई महशर सा गुज़र जायेगा
कोई परवाना मगर अब न इधर आयेगा

कितने गाते हुए अरमानों की बरसात के बाद
आस की झील में लहराये थे कुछ नील-कँवल
क्या ख़बर थी के वो महफ़िल ही उजड़ जायेगी
जिसमें गाई थी कभी हमने मोहब्बत की ग़ज़ल
अपना हर नग़मा ख़लाओं में बिखर जायेगा
कोई परवाना मगर अब न इधर आयेगा

इतने बे-हिस तो हुआ करते नहीं अहल-ए-वफ़ा
जाने क्या सोच के तौहीन-ए-वफ़ा की तूने
कोई झोंका भी जिसे छू न सका तेरे बग़ैर
अपने हाथों से वही शम्मा बुझा दी तूने
क्या ख़बर थी तेरा अहसास भी मर जायेगा
कोई परवाना मगर अब न इधर आयेगा -२

Comments/Credits:

			 % Song Courtesy: http://www.indianscreen.com
% Credits: Afzal A Khan
		     
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