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dekhe bhaale dost hamaare ye jaane pahachaane log - - Mehdi Hasan

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शहर-ए-तरब में गीले गीले फिरते हैं मस्ताने लोग
अपनी नज़र है वीरानों पर हम ठहरे दीवाने लोग

देखे भाले दोस्त हमारे ये जाने पहचाने लोग
इनकी नज़र फिरते ही बन गये सब के सब बेगाने लोग

बज़्म-ए-तरब में शीशे उछले जाने कितने दिल टूटे
साग़र-ओ-चश्म छलकते रहे और भरते रहे पैमाने लोग

तेरे करम से मेरी वुसअत रौनक का सामान बनी
अब भी आ जाते हैं अक्सर अपना दिल बहलाने लोग

अपने ऐश की जोत जगाने मेरे ग़म के अन्धेरे में
अपने ही पिन्दार की ख़ातिर आते हैं समझाने लोग

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