Browse songs by

bhulaataa laakh huu.n lekin baraabar yaad aate hai.n - - Mujaddad Niazi

Back to: main index
View: Plain Text, हिंदी Unicode, image


भुलाता लाख हूं लेकिन बराबर याद आते हैं
एलाही तर्क-ए-उल्फ़त पर वो क्यूं कर याद आते हैं

न छेड़ ऐ हम-नशीं कैफ़िअत-ए-सह्बा के अफ़साने
शराब-ए-बेख़ुदी के मुझ को साग़र याद आते हैं

नहीं आती तो याद उनकी महीनों तक नहीं आती
मगर जब याद आते हैं तो अक्सर याद आते हैं

हक़ीक़त खुल गैइ हस्रत तेरे तर्क-ए-मुहब्बत की
तुझे तो अब वो पह्ले से भी बढ़ कर याद आते हैं

View: Plain Text, हिंदी Unicode, image