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zaraa\-zaraa bahakataa hai mahakataa hai

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ज़रा-ज़रा बहकता है, महकता है,
आज तो मेरा तन-बदन, मैं प्यासी हूँ,
मुझे भर ले अपनी बाँहों में
है मेरी क़सम, तुझको सनम, दूर कहीं न जा
ये दूरी कहती है पास मेरे आजा रे

यूँ ही बरस-बरस काली घटा बरसे,
हम यार भीग जाएँ इस चाहत की बारिश में
मेरी खुली-खुली लटों को सुलझाए
तू अपनी उँगलियों से, मैं तो हूँ इसी ख़्वाहिश में
सर्दी की रातों में हम सोए रहें इक चादर में
हम दोनों तनहा हों, न कोई भी रहे इस घर में

ज़रा-ज़रा बहकता है ... बाँहों में

आजा रे, आ रे

तड़पाएँ मुझे तेरी सभी बातें,
इक बार ऐ दीवाने, झूठा ही सही, प्यार तो कर
मैं भूली नहीं हसीं मुलाक़ातें,
बेचैन कर के मुझको, मुझसे यूँ ना फेर नज़र
रूठेगा न मुझसे, मेरे साथिया, ये वादा कर
तेरे बिना मुश्किल है जीना मेरा, मेरे दिलबर

ज़रा-ज़रा बहकता है ... बाँहों में
है मेरी क़सम ... आजा रे

आजा रे, आजा रे, आजा रे

Comments/Credits:

			 % Transliterator: U.V. Ravindra.
% Credits: K. Vijay Kumar
% Date: 1 Feb 2003
% Series: GEETanjali, February 01, 2003
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