Browse songs by

zaraa sii baat pe har rasm to.D aayaa thaa - - Mukesh

Back to: main index
View: Plain Text, हिंदी Unicode, image


ज़रा सी बात पे हर रस्म तोड़ आया था
दिल-ए-तबाह ने भी क्या मिज़ाज पाया था

मुआफ़ कर ना सकी मेरी ज़िन्दगी मुझको
वो एक लम्हा कि मैं तुझसे तंग आया था

शगुफ़्ता फूल सिमट कर कली बने जैसे
कुछ इस तरह से तूने बदन चुराया था

गुज़र गया है कोई लम्हा-ए-शरर की तरह
अभी तो मैं उसे पहचान भी न पाया था

पता नहीं कि मेरे बाद उनपे क्या गुज़री
मैं चाँद ख्वाब ज़माने में छोड़ आया था

Comments/Credits:

			 % Credits: (tanvi@utxvms.cc.utexas.edu)
%          Preeti Ranjan Panda (ppanda@ics.uci.edu)
% Editor: Anurag Shankar (anurag@astro.indiana.edu)
		     
View: Plain Text, हिंदी Unicode, image