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zaahid sharaab piine de ... mujhako yaaro maaf karanaa

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ज़ाहिद शराब पीने दे मस्जिद में बैठकर
या वो जगह बता दे जहाँ पर खुदा न हो

मुझ को यारों माफ़ करना मैं नशे में हूँ
अब तो मुमकिन है बहकना मैं नशे में हूँ

कल की रात मिट रही है दर्द भी है कम
अब ज़रा आराम से आ जा रहा है दम
कम है अब दिल का तड़पना मैं नशे में हूँ

ढल चुकी है रात अब तो उठ गई महफ़िल
मैं कहाँ जाऊँ नहीं कोई मेरी मंज़िल
दो कदम मुश्क़िल है चलना मैं नशे में हूँ

है ज़रा सी बात और छलके है प्याले
पर न जाने क्या कहेंगे ये जहाँ वाले
तुम बस इतना याद रखना मैं नशे में हूँ

Comments/Credits:

			 % Credits: C. S. Sudarshana Bhat (cesaa129@utacnvx.uta.edu)
%          Preetham Gopalaswamy (preetham@src.umd.edu)
		     
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