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yuu.N i.ntazaar kaa dukh ... tum apane paas bulaa lo

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यूँ इंतज़ार का दुख, अब सहा नहीं जाता
तड़प रही है मोहब्बत, रहा नहीं जाता
तुम अपने पास बुला लो, बहुत उदास हूँ मैं

भटक चुकी हूँ बहुत, ज़िंदगी की राहों में
मुझे अब आके छुपा लो, तुम अपनी बाहों म.एन
मेरा सवाल न टालो, बहुत उदास हूँ मैं

हर एक साँस में मिलने की प्यास पलती है
सुलग रहा है बदन और रूह जलती है
बचा सको तो बचा लो, बहुत उदास हूँ मैं

Comments/Credits:

			 % Transliterator: Rajiv Shridhar (rajiv@hendrix.coe.neu.edu)
% Date: Sat Jan 27 1996
		     
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