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ye raat ye chaa.Ndanii phir kahaa.N

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ये रात ये चाँदनी फिर कहाँ, सुन जा दिल की दास्तां
चाँदनी रातें प्यार की बातें खो गयी जाने कहाँ
ये रात ये चाँदनी फिर कहाँ, सुन जा दिल की दास्तां

आती है सदा तेरी टूटे हुए तारों से
आहट तेरी सुनती हूँ खामोश नज़ारों से
भीगी हवा, उमड़ी घटा कहती है तेरी कहानी
तेरे लिये बेचैन है शोलों मे लिपटी जवानी
सीने मे बल खा रहा है धुआं, सुन जा दिल की दास्तां
ये रात ये चाँदनी फिर कहाँ, सुन जा दिल की दास्तां

लहरों के लबों पर हैं खोये हुए अफ़साने
गुलज़ार उम्मीदों के सब खो गये वीराने
तेरा पता पाऊं कहाँ सूने हैं सारे ठिकाने
जाने कहाँ गुम हो गये जाके वो अगले ज़माने
बरबाद है आरज़ू का जहाँ, सुन जा दिल की दास्तां
दास्तां दास्तां दास्तां

ये रात ये चाँदनी फिर कहाँ
सुन जा दिल की दास्ताँ
ये रात...

पेड़ों की शाखों पे सोई सोई चाँदनी
तेरे खयालों में खोई खोई चाँदनी
और थोड़ी देर में थक के लौट जाएगी
रात ये बहार की फिर कभी न आएगी
दो एक पल और है ये समा, सुन जा...

लहरों के होंठों पे धीमा धीमा राग है
भीगी हवाओं में ठंडी ठंडी आग है
इस हसीन आग में तू भी जलके देखले
ज़िंदगी के गीत की धुन बदल के देखले
खुलने दे अब धड़कनों की ज़ुबाँ, सुन जा...

जाती बहारें हैं उठती जवानियाँ
तारों के छाओं में पहले कहानियाँ
एक बार चल दिये गर तुझे पुकारके
लौटकर न आएंगे क़ाफ़िले बहार के
आजा अभी ज़िंदगी है जवाँ, सुन जा...

Comments/Credits:

			 % Transliterator: Ravi Kant Rai (rrai@ndsun.cs.ndsu.nodak.edu)
% 	Venkatasubramanian K Gopalakrishnan (gopala@cs.wisc.edu)
% Credits: C. S. Sudarshana Bhat (cesaa129@utacnvx.uta.edu)
% Editor: Anurag Shankar (anurag@astro.indiana.edu)
		     
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