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waqt\-e\-piirii shabaab kii baate.n - - Ghulam Ali

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वक़्त-ए-पीरी शबाब की बातें
ऐसी हैं जैसे ख़्वाब की बातें

फिर मुझे ले चला उधर देखो
दिल-ए-ख़ाना-खराब की बातें

महजबीं याद है कि भूल गये
वो शब-ए-माहताब की बातें

तुझको रुसवा करेंगी ख़ून-ए-दिल
तेरी ये इज़्तिराब की बातें

सुनते हैं उनको छेड़ छेड़ के हम
उसके मुँह से इताब की बातें

ज़िक्र था जोश-ए-इश्क़ में ऐ 'ज़ौक़'
हम से हों सब्र-ओ-ताब की बातें

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