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vaahe guruu ... ye zamii.n hai rahaguzar tere mere vaaste

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वाहे गुरू का खालसा वाहे गुरूजी की फ़तह
ये ज़मीं है रहगुज़र तेरे मेरे वास्ते
हर घड़ी है इक सफ़र तेरे मेरे वास्ते
नई मंज़िलों को चले नए रास्ते
ये ज़मीं है ...

इस गगन के तले हम जो घर से चले
सिर्फ़ ये ख़्वाब ही साथ है
अगले ही मोड़ पर होने को है सहर
बस ज़रा देर को रात है
ख़ुशियों से होनी अभी मुलाकात है
ये ज़मीं है ...

जाने क्यूं ये हुआ क्यूं चली ये हवा
बुझ गए हर खुशी के दिये
कैसी रुत आई है साथ जो लाई है
इतने ग़म मेरे दिल के लिए
ये गर्म आँसू कोई कैसे पिए
ये ज़मीं है ...

ग़म की दीवार से दुख की ज़ंजीर से
रुक सकी है कहां ज़िंदगी
इक नया हौसला लेके ये दिल चला
आरज़ू दिल में है फिर नई
इन आँखों में फिर हैं सजे ख़्वाब कई
ये ज़मीं है ...

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