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usakii hasarat hai jise dil se miTaa bhii na sakuu.N

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१.
उस की हसरत है जिसे दिल से मिटा भी न सकूँ
ढूँढने उस को चला हूँ जिसे पा भी न सकूँ

२.
मेहरबाँ हो के बुला लो मुझे चाहो जिस वक़्त
मैं गया वक़्त नहीं हूँ कि फिर आ भी न सकूँ

३.
डाल कर ख़ाक मेरे ख़ून पे क़ातिल ने कहा
कुछ ये मेंहदी नहीं मेरी कि मिटा भी न सकूँ

४.
ज़ौफ़ में ताना-ए-अग़यार का शिकवा क्या है
बात कुछ सर तो नहीं है कि उठा भी न सकूँ

५.
ज़ब्त कमबख़्त ने और आ के गला घोंटा है
कि उसे हाल सुनाऊँ तो सुना भी न सकूँ

६.
ज़हर मिलता ही नहीं मुझको सितमगर वर्ना
क्या क़सम है तेरे मिलने की कि खा भी न सकूँ

७.
उस के पहलू में जो ले जा के सुला दूँ दिल को
नींद ऐसी उसे आये के जगा भी न सकूँ

Comments/Credits:

			 % Contributor: Vinay P Jain
% Transliterator: Vinay P Jain
% Date: 7 Jun 2004
% Series: Andaaz-e-Bayaan Aur
% Comments: The song was first released on EPs in late 60s/
% early 70s. Later, in late 80s, HMV released a collection of some
% ghazals of Jagjit-Chitra from that era pakcaged as 'Rare Gems'.
% She'rs # 2, 4, 6 are by Ghalib and the rest by Amir Minai.
% generated using giitaayan
		     
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