Browse songs by

udhar baalo.n me.n ka.nghii ... zulfo.n kii sunaharii chhaa.Nv tale

Back to: main index
View: Plain Text, हिंदी Unicode, image


उधर बालों में कंघी हो रही है ख़म निकलता है
इधर रग रग से खिंच खिंच कर हमारा दम निकलता है

ज़ुल्फ़ों की सुनहरी छाँव तले
इक आग लगी दो दीप जले
जब पहली नज़र के तीर चले
मत पूछ कि दिल पर क्या गुज़री

जब प्यार हुए दो नैन मिले
जब आयी बहार और फूल खिले
जब बात हुई और लब न हिले
मत पूछ कि दिल पर क्या गुज़री ...

इतना सा है दिल का अफ़साना
अपना न हुआ इक बेगाना
नज़रें तो मिली और दिल न मिले
कुछ उनसे हमें शिक़वे न गिले
क्या खूब मिले उल्फ़त के सिले
मत पूछ कि दिल पर क्या गुज़री ...

रह रह के तड़पना घबराना
हर बात पे दिल भर भर आना
आँसू भी बहे सीना भी जले
अरमान अजब काँटों में ढले
इस प्यार से हम बेप्यार भले
मत पूछ कि दिल पर क्या गुज़री ...

Comments/Credits:

			 % Transliterator: Vijay Kumar
		     
View: Plain Text, हिंदी Unicode, image