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tujhe bhuul ke maaTii ... o terii duniyaa kaisii tuu jaane

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तुझे भूल के माटी की पुतली पर
कोई मन की खिड़की खोल रहा
जिसमें तेरा नाम तुले जग उसमें
सोना-चाँदी तोल रहा

अपना क्या है हम तो अनजाने
ओ तेरी दुनिया कैसी तू जाने
जीवन पथ पे निकले दो पल को हम
अपने जी को बहलाने
ओ तेरी दुनिया ...

तूने जब दुनिया ये बनाई
धरती की चादर फैलाई
चन्दा-सूरज की जोत जलाई
पर जिसके लिए जग तूने रचा
वो करके इसे वीरान रहा
धरती की चादर छीन चुका
अब चाँद और सूरज माँग रहा
ये तेरे बन्दों के अफ़साने
ओ तेरी दुनिया ...

उल्टी गंगा बहे
जोगी चुप कैसे रहे
अब देवता कुछ भी नहीं
मानवता कुछ भी नहीं
यार से यारी गई वो दिलदारी गई
ऐसी छाया तले हम दीवाने भले
कैसा प्यार कहाँ की दोस्ती कैसा रिश्ता-नाता
तेरे होते इन्सान तेरा शैतान हुआ ओ दाता
पर ये क्या कह रहे हम दीवाने
ओ तेरी दुनिया ...

जब दिल में पराया दर्द उठे
दूजे के तू काम आए यारा
तब ज्ञान मिला जीवन तुझको
चाँदी-सोने से भी प्यारा
वरना धन तो चीज़ ही क्या है
कहे मियाँ नज़ीरा का इकतारा
सब ठाठ पड़ा रह जाएगा
जब लाद चलेगा बंजारा
काम आएँगे यही प्यार के नज़राने
ओ तेरी दुनिया ...

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