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terii gaTharii me.n laagaa chor musaafir jaag zaraa - - Manna Dey

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( तेरी गठरी में लागा चोर मुसाफ़िर जाग ज़रा
जाग ज़रा ) -२
तेरी गठरी में लागा चोर मुसाफ़िर

( आज ज़रा सा फ़ितना है ये
तू कहता है कितना है ये ) -२
( दो दिन में ये बढ़ कर होगा
मुँह-फट और मुँह-ज़ोर ) -२

मुसाफ़िर जाग ज़रा
जाग ज़रा
( तेरी गठरी में लागा चोर मुसाफ़िर जाग ज़रा
जाग ज़रा ) -३

नींद में माल गँवा बैठेगा -२
( नींद में माल गँवा बैठेगा
अपना आप लुटा बैठेगा ) -२
फिर पीछे कुछ नहीं बनेगा
( फिर पीछे कुछ नहीं बनेगा
लाख मचाये शोर ) -२

मुसाफ़िर जाग ज़रा
जाग ज़रा
तेरी गठरी में लागा चोर मुसाफ़िर जाग ज़रा
जाग ज़रा
तेरी गठरी में लागा चोर मुसाफ़िर
गठरी में लागा चोर मुसाफ़िर
गठरी में लागा चोर मुसाफ़िर जाग ज़रा
जाग ज़रा
तेरी गठरी में लागा चोर
चोर

Comments/Credits:

			 % Song courtesy: http://www.indianscreen.com (Late Shri Amarjit Singh)

% Seems to be a tribute to K C Day by his nephew Manna Dey.
% song is originally from Dhoop Chhaaon/ Bhagya Chakra/ 1935
% by the M.D. & lyricists whose name has been retained.
		     
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