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taqadiir ke kalam se ko_ii bach na paayegaa

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तक़दीर के कलम से कोई बच न पायेगा -२
पेशानी पे जो लिखा है वो पेश आयेगा
मालिक ने जो लिख दिया है वो मिटा न पायेगा
पेशानी पे जो लिखा है वो पेश आयेगा
वो पेश आयेगा

चाहने से कभी आरज़ू के फूल ना खिले
ख़ुशी के चार दिन भी ज़िंदगी में ना मिले
देखिये ये प्यार भी कितना मजबूर है
मंज़िल के पास आ के भी मंज़िल से दूर है
इक नज़र भर के भी ना तू देख पायेगा
पेशानी पे जो लिखा है वो पेश आयेगा
वो पेश आयेगा

क़िस्मत बिना कोई किसी को पा नहीं सके
और प्यार को सीने से भी लगा नहीं सके
मिलने से पहले ही यहाँ दिल टूट जाते हैं
सफ़र से पहले हमसफ़र भी छूट जाते हैं
तक़दीर तुझपे हँसेगी तू रो ना पायेग
पेशानी पे जो लिखा है वो पेश आयेगा
वो पेश आयेगा
तक़दीर के कलम से कोई बच न पायेगा
पेशानी पे जो लिखा है वो पेश आयेगा
वो पेश आयेगा -२

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