Browse songs by

ta.ng aa chuke hai.n kashmakash\-e\-zindagii se ham

Back to: main index
View: Plain Text, हिंदी Unicode, image


तंग आ चुके हैं कश्मकश-ए-ज़िन्दगी से हम
ठुकरा ना दें जहाँ को कहीं बेदिली से हम
तंग आ चुके

लो आज हमने तोड़ दिया, रिश्ता-ए-उम्मीद - २
लो अब कभी गिला ना करेंगे किसी से हम
ठुकरा ना दें जहाँ को कहीं बेदिली से हम
तंग आ चुके

गर ज़िन्दगी में मिल गये फिर इत्तफ़ाक़ से - २
पूछेंगे अपना हाल तेरी बेबसी से हम
ठुकरा ना दें जहाँ को कहीं बेदिली से हम
तंग आ चुके

ओ आसमान वाले कभी तो निगाह कर - २
अब तक ये ज़ुल्म सहते रहे खामोशी से हम
ठुकरा ना दें जहाँ को कहीं बेदिली से हम
तंग आ चुके
तंग आ चुके हैं कश्मकश-ए-ज़िन्दगी से हम
तंग आ चुके
<ब्र/>the last verse was simplified again from the original: <ब्र/>
अल्लाह रे फ़रेब-ए-मशीयत के आज तक
दुनिया के ज़ुल्म सहते रहे खामोशी से हम
<ब्र/>[मशीयत=the will of god] <ब्र/>another good one from the same ghazal is: <ब्र/>
मायूसी-ए-माल-ए-मोहब्बत ना पूछिये
अपनों से पेश आये हैं बेगानगी से हम
<ब्र/>[माल=termination, also, consequence] <ब्र/>

Comments/Credits:

			 % Transliterator: Ravi Kant Rai (rrai@plains.nodak.edu)
% Editor: Anurag Shankar (anurag@chandra.astro.indiana.edu)
		     
View: Plain Text, हिंदी Unicode, image