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tabiyat thiik thii aur dill bhii beqaraar na thaa

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तबियत थीक थी और दिल्ल भी बेक़रार न था
( तबियत थीक थी और दिल्ल भी बेक़रार न था
ये तब की बात है के जब किसी से प्यार न था ) -२

न थीं बेचैनियाँ बेताबियाँ और ग़म भी न था
कोई महबूब न था कोई भी हमदम नहीं न था
किसी (?) का और इंतज़ार न था

ये तब की बात है के जब किसी से प्यार न था
तबियत थीक थी और दिल्ल भी बेक़रार न था
ये तब की बात है के जब किसी से प्यार न था

किसी पराये की बातों में ये मिठास (?) न थी
मेरे पे (?) आज दिल को तो कोई भी आस न थी
किसी के झूठे वादों पे भी ऐतबार न था

ये तब की बात है के जब किसी से प्यार न था

मेरी नींदों की दुनिया में किसी के सपने न थे
जहाँ के दर्द और दुख भी मेरे अपने न थे
मेरा दिल ठँडी आह का कभी शिकार न था

ये तब की बात है के जब किसी से प्यार न था
तबियत थीक थी और दिल्ल भी बेक़रार न था -२
ये तब की बात है के जब किसी से प्यार न था

Comments/Credits:

			 % Song courtesy: http://www.indianscreen.com (Late Shri Amarjit Singh)
		     
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