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so gaii chaa.Ndanii jaag uthii bekalii

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सो गैइ चाँदनी जाग उथी बेकली
ग़म सताने लगे
तुम मुझे और भी याद आने लगे

थी ? खुशी, ज़िन्दगी,
आँख में अश्क़ भी,दबदबाने लगे
तुम मुझे और भी ...

लाख उमंगें लिये,रात धलने लगी
मेरि तनहाई करवट बदलने लगी
हाये रे बेबसी,
अब मेरे साये भी,मून्ह छुपाने लगे
तुम मुझे और भी ...

दूर तक मेरे दिल की पुकारें गैइ -२
फिर ना लौटें,कुछ ऐसी बहारें गैइ
शाम-ए-ग़म की क़सम
अब तो मेरे क़दम,दगमगाने लगे
तुम मुझे और भी ...

Comments/Credits:

			 %Transliterator:Srinivas Ganti
%Date: July 26, 2001
		     
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