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simaTii hu_ii ye gha.Diyaa.N

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ल : सिमटी हुई ये घड़ियाँ
फिर से न बिखर जायेँ -२
र : इस रात में जी लें हम
इस रात में मर जायेँ
दो : इस रात में मर जायेँ
सिमटी हुई ये घड़ियाँ

र : अब सुबहा न आ पाये
ल : आओ ये दुआ माँगें
अब सुबहा न आ पाये
र : आओ ये दुआ माँगें
ल : इस रात के हर पल से
रातें ही उभर जायेँ
दो : रातें ही उभर जायेँ
सिमटी हुई ये घड़ियाँ

ल : दुनिया की निगाहें अब
हम तक न पहुँच पायेँ
र : दुनिया की निगाहें अब
हम तक न पहुँच पायेँ
ल : तारों में बसें चलकर
र : धरती पे उतर जायेँ
दो : धरती पे उतर जायेँ
सिमटी हुई ये घड़ियाँ

ल : ( हालात के तीरों से
छलनी हैं बदन अपने ) -२
र : पास आओ के सीनों के
कुछ ज़ख़्म तो भर जायेँ -२
दो : सिमटी हुई ये घड़ियाँ

र : आगे भी अन्धेरा है
ल : पीछे भी अन्धेरा है
आगे भी अन्धेरा है
र : पीछे भी अन्धेरा है
दो : अपनी हैं वोही साँसें
जो साथ गुज़र जायेँ -२
सिमटी हुई ये घड़ियाँ

ल : आ


हूँ हूँ हूँ
ये घड़ियाँ
फिर से
हूँ हूँ हूँ
सिमटी हुई
हूँ हूँ हूँ

( बिछड़ी हुई रूहों का
ये मेल सुहाना है ) -२
र : इस मेल का कुछ अहसाँ
जिसमों पे भी कर जायेँ
दो : जिसमों पे भी कर जायेँ
सिमटी हुई ये घड़ियाँ

ल : तरसे हुये जज़बों को
अब और न तरसाओ
र : तरसे हुये जज़बों को
दो : अब और न तरसाओ
र : तुम शाने पे सर रख दो
ल : हम बाँहों में भर जायेँ -२
दो : सिमटी हुई ये घड़ियाँ

Comments/Credits:

			 % Credits: Surma Bhopali
% Song courtesy: http://www.indianscreen.com (Late Shri Amarjit Singh)
		     
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