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shikavaa na kar gilaa na kar

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शिकवा न कर गिला न कर
ये दुनिया है प्यारे, यहां ग़म के मारे, तड़पते रहे
शिकवा न कर गिला न कर

ख़िज़ां इस गुलिस्तां में आती रही है
हवा सूखे पत्ते उड़ाती रही है
यहां फूल खिल के, बहारों से मिल के, बिछड़ते रहे
शिकवा न कर गिला न कर

यहां तेरे अश्कों की क़ीमत नहीं है
रहम करना दुनिया की आदत नहीं है
किसी ने न देख, यहान ख़ूं के आँसू, ढलकते रहे
शिकवा न कर गिला न कर

यहां का है दस्तूर ख़ामोश रहना
जो गुज़री है दिल पे किसी से न कहना
ये दिन ?????? के, यहान लोग बस के, उजड़्ते रहे
शिकवा न कर गिला न कर

ये दुनिया है प्यारे, यहां ग़म के मारे, तड़पते रहे
शिकवा न कर गिला न कर

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			 % Date: JULY 2, 2000
		     
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