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shahar kii pariyo.n ke piichhe jo hai.n diivaane

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शहर की परियों के पीछे जो हैं दीवाने
वो हमारी सादगी का रंग क्या जानें
अरे हाँ आहा आहा दिलदार बेवफ़ा
जो नहीं समझे कि हम हैं जिसके दीवाने
वो हमारी आशिक़ी का रंग क्या जानें
अरे हाँ आहा आहा समझो ना मेरी जां

कोई होगा हसीं कम तो हम भी नहीं
देखो ज़रा नज़र भर के
इतना उड़ोओ नहीं हो न ऐसा कहीं
न इधर के रहे न उधर के
शहर की परियों के ...

यहां तो बड़े बड़े लुट गए खड़े खड़े
बचके वो भी कहां जाएंगे
सुन के मेरी सदा छोड़ के नाज़-ओ-अदा
कच्चे धागे में बंधे आएंगे
जो नहीं समझे ...

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