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shabanam kyuu.N niir bahaaye - Ishara

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शबनम क्यूँ नीर बहाये -२
दुनिया सोये
और ये रोये जाये
शबनम क्यूँ नीर बहाये

जैसे निरधन के रोने पर -२
हँसते हैं धनवान
वैसे शबनम के रोने पर -२
कलियों की मुसकान
शबनम रोये
कलियों का मुँह धोये
( अपनी जान गँवा कर पगली
जग में फूल खिलाये ) -२
शबनम क्यूँ नीर बहाये -२

मूरख हैं जो चार घड़ी के -२
जीवन पर इतराते हैं
हंसते फूलों को देखो जो -२
खिलते ही मुरझाते हैं
शबनम रोये
मूरख गाफ़िल सोये
( रो-रो के शबनम इस झूठे
जग का भेद बताये ) -२
शबनम क्यूँ नीर बहाये -२

Comments/Credits:

			 % Credits: This lyrics were printed in Listeners' Bulletin Vol #120 under Geetanjali #110
		     
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